विवाह संस्कार Vivah Sanskar
विवाह संस्कार Vivah Sanskar हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में विद्याध्ययन के पश्चात् विवाह संस्कार करके गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना होता है। यह संस्कार पितृ ऋण से उऋण होने के लिए किया जाता है। मनुष्य जन्म से ही तीन ऋणों से बंधकर जन्म लेता है- {देव ऋण} {ऋषि ऋण} {और पितृ ऋण} इनमें से पूजा पाठ अर्थात यज्ञादिक कार्यों से देव ऋण वेद पुराण तथा शास्त्रों के अध्ययन से ऋषि ऋण और विवाहित पत्नी से संतान उत्पत्ति पुत्रोत्पत्ति आदि के द्वारा पितृ ऋण से उऋण हुआ जाता है। प्रमुख संस्कार हिन्दू धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। विवाह दो शब्दों से मिलकर बना है👉 वि + वाह। अत: इसका शाब्दिक अर्थ है- विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। [पाणिग्रहण] संस्कार को सामान्य रूप से {हिन्दू विवाह} के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है। परंतु हिन्दू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है, जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा ...