शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है बिल्वपत्र और जल


सत्य सनातन धर्म की जय हो आज हम जानेंगे कि भगवान शंकर को बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है बेलपत्र चढ़ाने से क्या लाभ भगवान
भगवान शिव की कोई भी पूजा बेलपत्र चढ़ाए बिना पूर्ण नहीं माना जाती।
शिव महापुराण में कहा जाता है कि बेलपत्र अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं।
और श्रद्धालु को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

लेकिन भगवान शंकर को क्यों चढ़ाया जाती है बेलपत्र यह जानकारी आज आपको दी जाएगी इस जानकारी को आप ध्यानपूर्वक पढ़िएगा

बेलपत्र का महत्व

बेलपत्र में तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं जिसको लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं।
तीन पत्तों को कहीं त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु,महेश) का स्वरूप माना जाता है तो कहीं तीन गुणों (सत्व, रज और तम) 
तो कहीं तीन आदि ध्वनियों आकार, मकार,उकार, (जिनकी सम्मिलित गूंज से ऊं बनता है) का प्रतीक माना जाता है।
बेलपत्र की इन तीन पत्तियों को महादेव की तीन आंखें या उनके शस्त्र त्रिशूल का भी प्रतीक माना जाता है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से जुड़ी पौराणिक कथा
आदिकाल में जब देव और असुरों के द्वारा समुद्र मंथन किया गया तब समुद्र मंथन से कालकूट नाम का विष निकला था जिस विष को  देवता और असुरों ने भी स्वीकार नहीं किया।
तब संपूर्ण सृष्टि में कोलाहल हाहाकार मच गया कि इस विष का क्या होगा तब देव और असुरों ने भगवान शंकर से प्रार्थना करी कि हे देवा दी देव महादेव आप ही हमें इस संकट से बचा सकते हैं।
तब जाकर के भगवान शंकर ने कालकूट विष का पान किया और संपूर्ण सृष्टि को इस कालकूट विष के दुष्प्रभाव से बचाया।
फिर भगवान शंकर ने सोचा अगर मैं इस विष को पेट के अंदर डालता हूं तो अंदर की सृष्टि समाप्त होती है। और अगर मुंह से बाहर फेकता हूं तो बाहर के सृष्टि समाप्त होती है तब मां भगवती पार्वती शक्ति का रूप धर के उनके कंठ में विराजमान हो गई और भगवान शंकर ने उस विष को वहीं पर रोक दिया तभी से भगवान शंकर का नाम नीलकंठ हुआ जो नीलकंठ महादेव ऋषिकेश में हैं 
फिर भगवान शंकर द्वारा विष को कंठ में रखने से पूरा शरीर अत्यधिक गर्म हो गया 
संपूर्ण सृष्टि का वातावरण अत्यधिक बढ़ गया।
तब जाकर के सभी देवताओं ने भगवान शंकर को विष को काटने के लिए बेलपत्र चढ़ाना शुरू किया और जल चढ़ाना शुरू किया जिससे कि भगवान शंकर की जो गर्मी उत्पन्न हुई थी वह गर्मी शांत हो।
और तभी से यह प्रथा चली आ रही है कि भगवान शंकर को लोग बेलपत्र और जल चढ़ाते हैं जिससे कि भगवान शंकर अति प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा करते हैं भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं विशेषकर श्रावण के माह में भी भक्तों के द्वारा भगवान शंकर को अनेक प्रकार के भोग जल और बेलपत्र से भगवान का पूजन किया जाता है जिससे कि भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं
भगवान शंकर को बेलपत्र चढ़ाने पर बोलना चाहिए यह मंत्र

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम् ।
त्रिजन्मपाप-संहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।1।। 

त्रिशाखैर्बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रै: कोमलै: शुभै: ।
शिवपूजां करिष्यामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।2।। 

अखण्डबिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे ।
शुद्धयन्ति सर्वपापेभ्यो ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।3।। 

शालिग्रामशिलामेकां विप्राणां जातु अर्पयेत्।
सोमयज्ञ-महापुण्यमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।4।। 

दन्तिकोटिसहस्त्राणि वाजपेयशतानि च ।
कोटिकन्या-महादानमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।5।। 

लक्ष्म्या: स्तनत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्।
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।6।। 

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्।
अघोरपापसंहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्।।7।। 

श्रीक्षेत्र निवासं च कमलेश्वर दर्शनम्।
प्रयागराघवम दृष्ट्वा एक बिल्वं शिवार्पणम्  ।।8।। 

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे ।
अग्रत: शिवरूपाय ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्।।9।। 

बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ।
सर्वपापविनिर्मुक्त: शिवलोकमवाप्नुयात्।।10।। 

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
भगवान शंकर को खंडित बेलपत्र ना चढ़ाएं।
बेलपत्र चढ़ाने पर भगवान को जल भी अवश्य अर्पण करें।
बेलपत्र पर भगवान शंकर के आराध्य देव श्री राम नाम अवश्य लिखें। 
बेलपत्र पर चंदन,तिल, अक्षत, अवश्य लगाएं।
जो लोग मंत्र द्वारा बेलपत्र नहीं चढ़ा सकते वे लोग इस मंत्र का जाप करके बेलपत्र चढ़ाएं
ॐ नमः शिवाय' 

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