भगवान सूर्य नारायण को प्रसन्न कैसे करें ?

भगवान सूर्यनारायण को कैसे प्रसन्न करें

सूक्ष्म छोटा सा उपाय बड़े काम का है आइए जानते हैं
सूर्य की शांति के लिए प्रात: स्नान करने के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित किया जाता है। 
भगवान सूर्य को जल अर्पित करते समय जल में लाल चंदन, लाल पुष्प, तथा तिल,और अक्षत, डालकर तांबे के कलश, से जल अर्पण करना चाहिए।
इसके बाद सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान, जप, होम करना चाहिए 
सूर्य भगवान पूर्व दिशा में उदय होते है। यदि किसी दिन सूर्य भगवान आकाश मंडल में नजर ना आए तो भी आप लोगों को अर्घ्य पूरब दिशा में ही देना चाहिए
अर्घ्य देते वक्त आपके दोनों हाथ सिर से ऊपर होने चाहिए।
और गिरती हुई जल की धारा से भगवान सूर्य को देखना चाहिए
ऐसा करने से सूर्य की सभी किरणें शरीर पर पड़ती हैं। सूर्य देव को जल चढ़ाने से नवग्रह की कृपा भी प्राप्त होती है।
अर्घ्य देने के बाद भगवान सूर्यनारायण की करनी चाहिए सात बार परिक्रमा।

अर्घ्य देते समय बोलना चाहिए यह मंत्र।

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते। 
अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:।।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय। 
मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा: ।।

भगवान सूर्यनारायण को प्रणाम करते समय बोलना चाहिए यह मंत्र इस मंत्र से भगवान सूर्य होते हैं प्रश्न तथा शारीरिक कष्टों का करते हैं निवारण।

जपाकुसुम संकाशम् काश्यपेयम् महाद्युतिम्
तमोरिम् सर्वपापघ्नम् प्रणतोस्मि दिवाकरम् ।

स्नान द्वारा उपाय =जन्मकुंडली में अगर सूर्य अनिष्टकारक हों तो व्यक्ति को स्नान करते समय जल में लाल फूल, या केसर, देवदारू, डलकर स्नान करना उत्तम रहता है।सूर्य के उपाय करने पर व्यक्ति में रोगों से लड़ने की शक्ति का विकास होता है।
प्रतिदिन प्रातः काल भगवान सूर्य को सूर्य नमस्कार योगासन करना चाहिए इसके करने से शारीरिक लाभ मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा भगवान सूर्य की कृपा बनी रहती है।
बेल की जड़ को धारण करने से भी सूर्य के अनिष्ट प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
भगवान सूर्यनारायण निसंतान दंपत्ति को देते हैं पुत्र प्राप्ति का वरदान नित्य प्रातः भगवान सूर्य से करनी चाहिए इस मंत्र बोलकर प्रार्थना

पुत्र प्राप्ति के लिए मन्त्र 

ऊँ भास्कराय पुत्रं देहि महातेजसे, 
धीमहि तन्नः सूर्य प्रचोदयात् ।

भगवान सूर्यनारायण को प्रसन्न करने के लिए किस प्रकार का दान होना चाहिए
तांबे के सिक्के बहते हुए पानी में प्रवाहित करें, तथा रात का भोजन बन जाने के पश्चात चूले की अग्नि को दूध से बुजाएं।
तथा प्रतिदिन प्रातः 7 देसी पान दान में दें
भगवान सूर्य की वस्तुओं का दान करने से भी सूर्य के अनिष्ट से बचा जा सकता है। सूर्य की दान देने वाली वस्तुओं में तांबा, गुड़, गेहूं, मसूर की दाल टमाटर,लाल वस्त्र,यज्ञोपवीत जनेऊ,दान की जा सकती है। यह दान प्रत्येक रविवार या सूर्य संक्रांति के दिन किया जा सकता है।
सूर्य संक्रांति हर महीने आती है जिसे संक्रांति पर्व कहते हैं वही सूर्य संक्रांति कहलाती है जब भगवान सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन करते हैं उसी को सूर्य संक्रांति कहते हैं।
सूर्य ग्रहण के दिन भी सूर्य की वस्तुओं का दान करना लाभकारी उत्तम माना गया है।
इस उपाय के अंतर्गत सभी वस्तुओं का एकसाथ भी दान किया जा सकता है। दान करते समय वस्तुओं का वजन अपने सामर्थ्य के अनुसार लिया जा सकता है। दान की जाने वाली वस्तुओं को व्यक्ति अपने संचित धन से दान करे तो अच्‍छा रहता है। किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य अगर खराब है तो उसके परिवार का कोई भी सदस्य उसकी तरफ से यह दान कर सकता है। 
दान करते समय व्यक्ति में भगवान सूर्यनारायण के प्रति पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास होना चाहिए तभी दान सफल होता है तथा दान करने वाले व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए विशेष मंत्र जाप भी किया जा सकता है।
सूर्य के मंत्रों में 'ॐ घूणि: सूर्य आदित्य: नमः' का जाप किया जा सकता है। इस मंत्र का जाप प्रतिदिन भी किया जा सकता है तथा प्रत्येक रविवार के दिन यह जाप करना विशेष रूप से शुभ फल देता है। प्रतिदिन जाप करने पर मंत्रों की संख्या 11, 21, या 108 हो सकती है। मंत्रों की संख्या को बढ़ाया भी जा सकता है तथा सूर्य से संबंधित अन्य कार्य जैसे हवन इत्यादि में भी इसी मंत्र का जाप करना अनुकूल रहता है।
मंत्र का जाप करते समय व्यक्ति को शुद्धता का पूरा ध्यान रखना चाहिए। मंत्र जाप की अ‍वधि में व्यक्ति को जाप करते समय सूर्य देव का ध्यान करना चाहिए। मंत्र जाप करते समय एकाग्रता बनाए रखना चाहिए तथा पूर्ण जाप किए बिना अपने स्थान से नहीं उठना चाहिए।

इस प्रकार कर सकते हैं आप सूर्य यंत्र की स्‍थापना  

सूर्य यंत्र की स्‍थापना करने के लिए सबसे पहले तांबे के पत्र या भोजपत्र पर विशेष परिस्थितियों में कागज पर ही सूर्य यंत्र का निर्माण कराया जाता है। सूर्य यंत्र में समान आकार के 9 खाने बनाए जाते हैं। इनमें निर्धारित संख्याएं लिखी जाती हैं। ऊपर के 3 खानों में 6, 1, 8 संख्याएं क्रमश: अलग-अलग खानों में होना चाहिए।
मध्य के खानों में 7, 5, 3 संख्याएं लिखी जाती हैं तथा अंतिम लाइन के खानों में 2, 9, 4 लिखा जाता है। इस यंत्र की संख्याओं की ‍यह विशेषता है कि इनका सम कही भी किया जाए उसका योगफल 15 ही आता है। 
संख्याओं को निश्चित खाने में ही लिखना चाहिए।
तांबे के पत्र पर ये खाने बनवाकर इनमें संख्याएं लिखवा लेनी चाहिए या फिर भोजपत्र या कागज पर लाल चंदन, केसर, कस्तूरी से इन्हें स्वयं ही बना लेना चाहिए। अनार की कलम से इस यंत्र के खाने बनाना उत्तम होता है। सभी ग्रहों के यंत्र बनाने के लिए इन वस्तुओं व पदार्थों से लेखन किया जा सकता है। सूर्य यंत्र इस प्रकार है। 

तथा यंत्र बनाने के बाद पंचामृत से यंत्र की विशेष पूजा प्रतिष्ठा करनी चाहिए जिससे कि यंत्र में सिद्धि बनी रहती है
इस यंत्र को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर कंठ में या दाई भुजा में धारण करने से भी अनुकूलता प्राप्त होती है।
जब जन्म कुंडली में सूर्य के दुष्प्रभाव प्राप्त हो रहे हों या फिर सूर्य राहु-केतु से पीड़ित हों तो सूर्य से संबंधित उपाय करना लाभकारी रहता है, विशेषकर ये उपाय सूर्य गोचर में जब शुभ फल न दे रहा हों तो इनमें से कोई भी उपाय किया जा सकता है।

इसके अलावा जब सूर्य गोचर में छठे घर के स्वामी या सातवें घर के स्वामी पर अपनी दृष्टि डाल कर उसे पीड़ित कर रहा हों, तब भी इनके उपाय करने से व्यक्ति के कष्टों में कमी होती है।






 

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