जन्मकुंडली में चंद्र दोष को कैसे दूर करें
जिस जातक की जन्मकुंडली में चंद्रमा का दोष है उस दोष का निवारण कैसे करें ।
नवग्रहों में चंद्रमा सबसे कोमल और सुंदर ग्रह है यह कर्क राशि का स्वामी है मन पर इसका अधिकार है चंद्रमा के विषय में आज विज्ञान से कुछ भी अनजान नहीं है मनुष्य के चरण इस पर पढ़ चुके हैं चंद्रमा पृथ्वी के निकट सबसे पास का ग्रह है इस कारण इस ग्रह का सबसे अधिक प्रभाव पृथ्वी पर पड़ता है श्री की रात के कृष्ण और शुक्ल पक्ष चंद्रमा के उदय और अस्त की गति के कारण होते हैं अब मैं थोड़ा विवरण कर्क राशि का प्रस्तुत करूंगा कर्क राशि स्त्री राशि है सौरमंडल में इसकी आकृति केकड़े के समान है स्वभाव शुभ चर राशि है।और इसका उदय पृष्ठोदय है।
दिशा दक्षिण है अंक दो है गृह स्वामी चंद्रमा है रंग गुलाबी है और कीट पतंगों में गणना है।जाति ब्राह्मण है शरीर में हृदय पर इसका स्थान है। चंद्रमा एक राशि पर केवल सवा दो दिन रहता है।
चंद्र द्वारा पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन जपना चाहिए यह मंत्र👇
ॐ सों सोमाय नम:।
चंद्रमा का पौराणिक मंत्र👇
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम। नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।
चन्द्रमा के तांत्रोक्त मंत्र👇
ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।
चन्द्रमा का वैदिक मंत्र -👇
ॐ इमं देवा असपत्नं ग्वं सुवध्यं।
महते क्षत्राय महते ज्यैश्ठाय महते जानराज्यायेन्दस्येन्द्रियाय इमममुध्य पुत्रममुध्यै
पुत्रमस्यै विश वोsमी राज: सोमोsस्माकं ब्राह्माणाना ग्वं राजा।
ॐ गदायुधधरम देव श्वेतवर्ण निशाकरम।
ध्यायेदमृतसंभूतम सर्वकामफलप्रदम ।।
इसके उपरांत फल की पूर्ण प्राप्ति के लिए चंद्रमां के मंत्र का 108 बार उच्चारण भी करना चाहिए ।
सोमवार को अगर रोहिणी नक्षत्र हो या अन्य कोई भोग न हो तो शुक्ल पक्ष में शुभ समय में चांदी के पत्र पर चंद्र यंत्र को उत्कीर्ण कराएं और उसके मध्य में एक मोती जड़वा कर चंद्र गायत्री मंत्र से उसे प्रतिष्ठित करें इसी पूजा कक्ष में रखें और नित्य पूजन करते रहें इस मंत्र को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर कंठ में अथवा भुजा में भी धारण कर सकते हैं।
चंद्र यंत्र
चंद्र यंत्र की विशेषता आप इसको कहीं से भी किसी भी प्रकार सम करें इसका योग सभी जगह से अट्ठारह आएगा
चंद्र गायत्री मंत्र इस प्रकार है।
ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विदमहे ।
कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।।
चंद्र गायत्री का मंत्र प्रतिदिन बोलना चाहिए सोमवार का उपवास करने से भी जातकों को चंद्र के दोषों से मुक्ति मिलती है। शुक्ल पक्ष के सोमवार से यह उपवास प्रारंभ करें और कम से कम 16 उपवास करें उपवास के दिन प्रातः काल पूजा आराधना के उपरांत दुग्ध पान कर सकते हैं तथा साईं काल 1 समय फलाहार कर लेना चाहिए ।
अथवा नमक रहित भोजन भी कर सकते हैं।
चंद्र की वस्तुओं का दान करने से भी चंद्र दोष की शांति होती है सोमवार को शुभ समय में निम्नलिखित वस्तुओं का दान करें चीनी,अथवा मिश्री, श्वेतशंख,श्वेत वस्त्र, चावल, दही,कपूर, इन सब चीजों का दान करने से चंद्र ग्रह की शांति होती है ।
चंद्र दोष से पीड़ित जातक को मोती तथा सफेद पुखराज का दान करना चाहिए । सफेद रंग के वस्त्र बांटने तथा धारण करने से चंद्र दोष पीड़ा का शमन होता है ।
मंदिरों में श्वेत शंख भेंट करें चंद्र दोष से पीड़ित जातक के लिए नित्य पंचगव्य से स्नान करना अत्यंत लाभदायक है। पंचगव्य में गाय के दूध गाय का दही गाय का घी गाय का गोबर तथा गोमूत्र का मिश्रण होता है।
इसके अतिरिक्त स्नान के जल में फिटकरी सफेद चंदन आदि मिलाकर स्नान करना चाहिए इससे भी उत्तम परिणाम मिलता है । अगर नित्य प्रतिदिन व्यक्ति निम्न सामग्री मिलाकर स्नान न कर सके तो सोमवार को निम्न सामग्री मिलाकर अवश्य स्नान करें जितना हो सकता है अगर व्यक्ति गंगा में स्नान करें ,माता, दादी, नानी, एवं महिलाओं, से आशीर्वाद प्राप्त करें चांदी की अंगूठी पहने रात्रि के समय दूध न पिए चंद्रमा छठे घर में हो तो खरगोश पाले बारहवें भाव में हो तो गुरु का उपाय करें और अपने गुरु से आशीर्वाद ले चौथे भाव में केतु होने पर परिवार के सभी सदस्यों से बराबर मात्रा में चांदी ले कर एक ही दिन बहते पानी में प्रवाहित करें इस प्रकार से जातक को चंद्रमा के दोषों से मुक्ति मिलती है।
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