जन्मदिवस कैसे मनाए , जन्मदिवस,Happy Birthday


जन्मदिन क्यों मनाया जाता है किस प्रकार मनाया जाता है किन देवताओं की आराधना करनी चाहिए तथा किन किन का आशीर्वाद लेना चाहिए तथा क्या नही करना चाहिए 

जन्म दिवस पर विशेष उन लोगों के लिए जो लोग पाश्चात्य संस्कृति की तरफ जा रहे हैं वे लोग एक बार अवश्य इस पोस्ट को पढ़ें तथा अपने सनातन धर्म के मार्ग पर चलें संपूर्ण ब्रह्मांड में सिर्फ और सिर्फ सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो सृष्टि से पहले था और सृष्टि के अंत तक रहेगा इसलिए अपने जीवन से कुरीतियों को छोड़कर सत मार्ग की तरफ चलें जिससे कि जीवन में अनंत सुख की प्राप्ति हो हम जन्म दिवस इसलिए मनाते हैं क्योंकि।
अपने पूर्व जीवन के सुकर्मों व दुष्कर्मों पर दृष्टि डालकर दुर्गुणों को त्यागने व सत्कर्मों को अपनाने के लिए भगवान से प्रार्थना करना ही जन्मदिवस मनाने का उद्देश्य है|
जन्म दिवस मनाने के लिए सर्वप्रथम अपने आचार्य कुल पुरोहित जी को कुछ दिवस पहले जन्मदिवस पूजन के लिए निमंत्रण अवश्य देना चाहिए। तथा कुल पुरोहित जी से निवेदन करना चाहिए कि आप मेरे जन्म दिवस पर मेरे घर पर आकर के मुझे अपने मुखारविंद से दिव्य मंत्रो का उच्चारण करके मेरे ऊपर कृपा करें आप मेरे जन्म दिवस पर वर्षफल का विधिवत पूजन करें। तथा अपने शुभ हाथों से दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करें।
जन्मदिवस की प्रातः काल की शुरुवात ऐसे करे
सर्व प्रथम प्रात: काल सूर्योदय से पहले उठकर भगवान का स्मरण करे प्रार्थना करे की मेरे परमात्मा आपका बहुत बड़ा उपकार था जो आपने मुझे मनुष्य योनि में जन्म दिया इसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूं धन्यवाद देता हु।
जन्मदिन के दिन तिल के तेल की मालिश करके जल में तिल एवं गंगाजल डालकर  इस मंत्र का उच्चारण करें 👇

ॐ गंगे च यमुने च व गोदावरी सरस्वती नर्मदे सिंधु कावेरी अस्मिन् जले सन्निधिं कुरु।  

इस मन्त्र को बोलकर स्नान करना चाहिए। स्नान केवल ठन्डे पानी से करना चाहिए। अगर जातक सामर्थवान  न हो तो गर्म जल से स्नान कर सकता है।
फिर अपने आगे की दिनचर्या को बढ़ाए।
अपने कुलदेवता का पूजन आदि कर के पंडित जी के साथ में बैठकर संकल्प के साथ स्वस्तिवाचन व शांति पाठ के मन्त्र स्वर सहित बोलें पंचांग पूजन तथा अष्टचिरंजीवी देवताओं का पूजन कुलदेवता का पूजन जन्म नक्षत्र तथा जन्म राशि का पूजन वर्षफल पूजन करके 
कष्टकारी ग्रहों की शांति के लिय यथा शक्ति दान पूजन कर पंडित जी के साथ निम्न मंत्रों का उच्चारण करें।

ओ३म् उप प्रियं पनिन्पतं युवानमाहुतीवृधम्|
अगन्म बिभ्रतो नमो दीर्घमायुः कृणोतु मे||
~अथर्ववेद-7.32.1
भावार्थ- हे स्तुति करने योग्य प्रियतम प्रभु! जिस प्रकार मैं इस आहुति द्वारा इस यज्ञ की अग्नि को बढ़ा रहा/रही हूँ, वैसे ही मैं सात्विक अन्न का सेवन करके अपनी आयु को बढ़ाता हुआ / बढ़ाती हुई प्रतिवर्ष अपना जन्मदिन मनाता/मनाती रहूँ|

ओ३म् इंद्र जीव सूर्य जीव देवा जीवा जीव्यासमहम्|
सर्वमायुर्जीव्यासम्||
~अथर्ववेद-19.70.1

भावार्थ- हे परम ऐश्वर्यवान देव!आप हमें श्रेष्ठ जीवन दो| हे सूर्य! हे देवगण! आपकी अनुकूलतापूर्वक मैं दीर्घजीवी हूं

जन्मदिवस पर बोले ये मंत्र
मार्कण्डेय भगवान जी का यह मंत्र बोलने से मिलती है 
परम आयु

ॐ मार्कण्डेय महाभाग सप्तकरूपान्तजीवन।
चिरंजीवी यथा त्वं भो भविष्यामि तथा मुने।।
रूपवान् वित्तवांश्चैव श्रिया युक्तश्च सर्वदा।
आयुरारोग्यसिद्धयर्थ प्रसीद भगवन् मुने।।
चिरंजीवी यथा त्वं भो मुनीनां प्रवरो द्विजः।
कुरूष्व मुनिशार्दुल तथा मां चिरजीविनम्।।
नववर्षायुतं प्राप्य महता तपसा पुरा।
सप्तैकस्य कृतं येन आयु में सम्प्रयच्छतु।।

अष्ट चिरंजीवी मंत्र
अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। 
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥

अर्थात: अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि को प्रणाम है। प्रतिदिन सुबह इन नामों के स्मरण से सारी बीमारियां दूर होती हैं और व्यक्ति को दीर्घायु की प्राप्ति होती है। 
जन्मदिन मनाने की सनातनी परम्परा 
अपना जन्म दिन दिनांक के आधार पर न मनाकर 
सनातन परम्परा के अनुसार तिथि (गते) के अनुसार मनाना श्रेष्ठ माना गया है। जैसे हम भगवान श्री कृष्ण जी का तथा श्री रामचंद्र जी का हनुमान जी का या आदि देवताओं का जन्म दिवस मनाते हैं तिथि के अनुसार उसी प्रकार से हमें भी अपना जन्म दिवस मनाना चाहिए यही सनातनी परंपरा है

जन्मदिवस के शुभ अवसर पर भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।
साथ ही आयु वृद्धि करने वाला मन्त्र  महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए।
ॐ त्रयंबकं यजामहे, सुगंधिम् पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

इस मंत्र का जाप जातक को अपने बीते हुए बरसों के हिसाब से अवश्य करना चाहिए। जितने वर्ष व्यतीत हुई उतनी बार मंत्र का जाप करें ऐसा करने से आपके जीवन में  आने वाली कठिनाइयाँ शीघ्र ही समाप्त हो जाएगी। यही नहीं यदि किसी अशुभ ग्रह से आप पीड़ित है तो उसमे भी आपको लाभ मिलेगा।

संपूर्ण पूजा विधि विधान से संपादित होने के बाद इस मंत्र का जाप करें
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं महामुने। यदर्चितं मया देवाः परिपूर्ण तदस्तु मे॥
पढ़कर प्रार्थना करें कि हे प्रजापति  इस जातक को चिरायु (जीवेम् शरद: शतं) आरोग्य, ऐश्वर्य, यश और आनंदमय जीवन प्रदान करें। तत्पश्चात, कुल पुरोहित आचार्य जी जातक का रोली से तिलक करें, तथा जातक को चरणामृत बांटे  गौदुग्ध में काले तिल और गुड़ डालकर पिलाएँ - सतिलं गुड़ सम्मिश्रं अंजल्यर्धमितं पयः।
केक की जगह भी कोई अन्य पौष्टिक व्यंजन बनाया जा सकता हैं, 
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जैसे कि हमारे गढ़वाल की परंपरा के अनुसार काली दाल की पकौड़ी और पूरियां भगवान को निवेदित करने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में बांटी जाती है अगर केक ही मांगना है तो विश्वसनीय बेक्री वाले से केक मंगाए जो पूर्ण रूप से  सनातनी हो सात्विक हो 

पूजन के बाद जातक माता-पिता को प्रणाम करें। सभी आदरणीय लोगों को और अपने गुरुजनों को प्रणाम करें। उनसे आर्शीवाद लें। माता-पिता बच्चों को उपहार में सिक्का व रूपया दें।या विद्या अध्यन की कोई भी वस्तु भेट करे।
इस दिन जन्मपत्रिका में एक (मोली(नाला) यानी कि लाल रंग का धागा बांधे। और हर साल एक-एक गांठ बांधते जाएं। 

जन्म दिवस के शुभ अवसर पर भूलकर भी न करें ये काम
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जन्मदिन के शुभअवसर पर तामसिक भोजन, मदिरा सेवन तथा अनैतिक क्रिया-कलाप करने से परहेज करना चाहिए। जन्मदिन पर नाखून एवं बाल नहीं काटने चाहिए।
अगर हो सके तो वाहन चलाना या वाहन से यात्रा  करना भी वर्जित है।
घर में या घर से बाहर किसी भी परिवारिक सदस्य या मित्र से लड़ाई झगड़ा नहीं करना चाहिए।

जन्मदिन पर क्या करना चाहिए 
अपने जन्मदिन के अवसर पर कोई ऐसा काम करने की कोशिश करे जिससे आपको आजीवन प्रेरणा मिलती रहे आप आंवला, पीपल,बरगद,आम,इत्यादि  फलदार पेड़ लगा सकते है पेड़ की वृद्धि आपको प्रेरित करती रहेगी।
जन्म कुंडली में जो कोई भी अरिष्ट ग्रह हो अथवा उनकी दशा चल रही हो तो उस दिन विशेष पूजा दान एवं होम द्वारा शांति करवानी चाहिए। यदि आप या आपका बच्चा शारीरिक कष्ट से गुजर रहा है तो अरिष्ट ग्रह का तुला दान कराने से शीघ्र ही रोग से मुक्ति मिलती है।

यदि आपकी साढ़े साती चल रही है या शनि की ढैया चल रही हो तो अपने जन्मदिन के दिन अवश्य ही छायापात्र का दान करना चाहिए तथा संभव हो तो अस्प्ताल,  कुष्ठाश्रम, में जाकर अन्न वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी आर्थिक लाभ, आयु, विद्या, यश एवं बल की वृद्धि होगी।

निम्न लेख पर अवश्य ध्यान दें 👇👇👇👌
मोमबत्ती जलाकर जन्मदिन मनाने से बचें क्योकि केक के ऊपर मोमबत्ती जलाकर बुझाना अशुभ है परन्तु आजकल इसका ही प्रचलन हो गया है
आप जलाए परन्तु मुंह से न बुझाए बल्कि सभी प्रज्ज्वलित मोमबत्तियों को अपने घर के प्रत्येक स्थान पर रख दे इससे आपके और आपके घर के अंदर नकारात्मक ऊर्जा से भी मुक्ति मिल जाएगी।जातक के जितने वर्ष पूर्ण हुए हैं उतने दीप रात्रि में जलाकर घर में सब जगह रखने चाहिए इससे जातक में बल बुद्धि तथा तेज तत्त्व की वृद्धि होती है।
हमारे सब संस्कार, उत्सव, शुभ कार्य दीप प्रज्ज्वलित कर आरंभ होते हैं। 
जलते दीप को बुझाना तो बहुत ही अशुभ मानते हैं। बच्चे हमारे कुलदीप हैं, उनके यशकीर्ति तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना दीपक जला कर करनी चाहिए, मोमबत्तियाँ  बुझाकर तो कभी नहीं। 
आयु और श्री वृद्घि के लिए प्रति वर्ष जन्म दिन (वर्धापन) मनाने की विधि शास्त्रों में बताई गई है। 
 इस तरह के संस्कारों की जानकारी के अभाव में युवा अगर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाता है तो दोष किसका ?
 दोष भी हम लोगों का है जो हम लोग सनातन संस्कृति को जानते हुए भी इसका प्रचार-प्रसार नहीं करते हैं हमें भटके हुए सनातनी लोगों को अपने धर्म की तरफ अग्रसर करना होगा उन्हें अपने सनातन धर्म की परंपराओं से अवगत कराना होगा।
 सत्य सनातन धर्म की जय हो,धर्म की जय हो,अधर्म का नाश हो,प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो, गौ माता की सेवा हो, गंगा मैया की जय हो,सदगुरुदेव भगवान की जय हो,
 

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