जन्मकुंडली में मगल दोष को कैसे दूर करें ?

सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय हो 
आज का विषय मंगल ग्रह से पीड़ित जातक को क्या उपाय करना चाहिए ?
मंगल के शुभ घर में बैठे होने से क्या लाभ होता है विधाता ने ब्रह्मांड की रचना के साथ ही व्यवस्था की दृष्टि से देवी-देवताओं की तरह ही ग्रहों और नक्षत्रों को भी जिम्मेदारी सौंपी है समय किसी भी प्राणी की केवल आई हुई निर्धारित नहीं करता अपितु उसके पूरे जीवन का नियंत्रक यही समय होता है और समय का संचालन विश्व में ग्रहों के माध्यम से होता है इन नौ ग्रहों में मंगल ग्रह स्वयं में विशेष महत्व रखता है इसलिए जहां एक ओर भूमि से उत्पन्न होने के कारण यह भूमि पुत्र कहलाता है वही सेनापति भी कहा जाता है शरीर में रक्त पर इसका आधिपत्य माना गया है राशि चक्र में भी 12 में से एक साथ दो राशियां मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी भी मंगल है भूमि पुत्र होने से धरती, जमीन, भवन, खेत खलियान, फैक्ट्री, आदि बातों में मंगल को आधार मानकर ही वास्तविकता जानी जा सकती है।
 इसलिए आज जिस वास्तुशास्त्र की इतनी चर्चा हो रही है वास्तु की अपेक्षा मंगल ग्रह का विचार कर और मंगल को अनुकूल बनाकर उसे विशेष रूप से प्रसन्न कर लिया जाए तो वास्तु देवता से भी अधिक अनुकूलता प्राप्त की जा सकती है।
 मानव शरीर में रक्त पर मंगल का विशेष प्रभाव होने तथा भूमि तत्व का स्वामी मंगल होने से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन का तो एक प्रकार से मंगल आधारभूत तत्व ही होता है।
  विशेषकर किसी महिला के वैवाहिक जीवन पर इसका और अधिक प्रभाव होता है युद्ध, नेतृत्व, सेनापति, पुलिस, मिलिट्री,की नौकरी अस्त्र-शस्त्र संचालन कृषि भूमि संबंधी कार्य भूगर्भ विशेषज्ञ भवन बनवाना भवन खरीदना शिक्षा पशुपालन अधिकारियों का विशिष्ट कारक ग्रह मंगल अगर मंगल दशम भाव में है मंगल विशिष्ट कारक ग्रह माना गया है।
   मंगल तृतीय पंचम दशम एकादश भाव में शुभ तथा प्रथम द्वितीय चतुर्थ सप्तम अष्टम  द्वादश भाव में अशुभ होता है
   
मंगल शुभ होने पर हमें बलवान, धैर्यवान, तथा सहिष्णुता, बनाता है इंजीनियरिंग गणितज्ञ या खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने के लिए मंगल का बलवान होना परम आवश्यक है।
व्यक्ति मंगल के शुभ प्रभाव से दृढ़ इच्छाशक्ति से युक्त होकर बड़ी बड़ी चुनौतियों को स्वीकार करता है तथा जीवन शुभ व्यवस्था एवं सुरुचिपूर्ण ढंग से जीता है।

मंगल अशुभ होने के कारण व्यक्ति क्रोधी अशिष्ट और उद्दंड हो जाता है बात विवाद झगड़े करता है और उसकी परवृति विध्वंसकारी  हो जाती है।
 आतंकवाद जैसी प्रवृतियां मंगल के अशुभता का ही परिणाम है  
छोटा सा परिचय

मंगल ग्रह के बारे में
मंगल का जन्म उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर हुआ था जो शिवलिंग वहां स्थापित है उसे मंगलनाथ कहा जाता है उस शिवलिंग की विधिवत पूजा करने से यह पाया गया है कि मंगल से अनुकूल फल शीघ्र मिलता है ।

मंगल दोष का उपाय निवारण
मंगल की अनिश्चितता के निवारण हेतु ज्योतिष शास्त्र ने अनेक उपायों का उल्लेख किया है यह उपाय अगर संपन्न की जाएं तो निश्चय ही मंगल की अनिश्चितता का निवारण हो सकता है मंगल ग्रह के द्वारा उत्पन्न पीड़ा को शांत करने हेतु जातक को मंगल के मंत्र का जप करना लाभदायक होता है इस जप को मंगलवार से ही प्रारंभ करें
मंगल ग्रह का प्रार्थना मंत्र-

ॐ धरणीगर्भसंभूतं विद्युतकान्तिसमप्रभम।
कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम।।


मंगल ग्रह का तांत्रिक मंत्र-

ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:

किसी भी शुभ योग में ताम्रपत्र में मंगल यंत्र को उत्कीर्ण कराएं मध्य में मूंगा जड़वा कर मंगल गायत्री से 108 बार जप करके पंचामृत से स्नान कराकर प्राण प्रतिष्ठा करके और नित्य पूजा करनी चाहिए अगर पीड़ा अधिक है तो इस यंत्र को भोजपत्र पर लिखकर कंठ में भी धारण कर सकते हैं अथवा तांबे की अंगूठी पर मंगल यंत्र खुदवाए और शुद्ध करके अनामिका उंगली में धारण कर लें
मंगल ग्रह की प्रसन्नता के लिए जातक को मंगलवार का उपवास करना चाहिए उपवास के दिन स्नान आदि के उपरांत हनुमान जी के दर्शन करें तथा एकाग्र मन से मीठा भोग लगाकर तथा दान करने से भी ग्रह के अनिष्ठता दूर होती है।
 
अतः निम्नलिखित वस्तुओं का दान करना चाहिए मूंगा, तांबा, लाल वस्त्र, लाल चंदन, मसूर की दाल, गुड, कस्तूरी, तथा दक्षिणा, 
  अधिक पीड़ा के समय विधिवत प्राण प्रतिष्ठित मंगल यंत्र का दान भी कल्याणकारी होता है मूंगा दान करना मंगल को शांत करना है विद्यार्थियों को लाल वस्त्र बांटे तथा हनुमान जी के मंदिर में भी लाल चोला चढ़ाएं इससे मंगल की शांति होती है।
  
मंगल दोष में निम्न सामग्री को स्नान के जल में डालें

मंगल ग्रह के दोष से पीड़ित जातक को लाल चंदन बेल की छाल जटामांसी  तथा गुड,एवं हींग, आदि पदार्थों से युक्त जल से स्नान करना चाहिए
   
    लाल किताब के सरल उपायों द्वारा भी आप अशुभ मंगल की शांति कर सकते हैं शुद्ध शहद, सिंदूर, तथा लाल मसूर की दाल,को बहते पानी में प्रवाहित करें।
बड़े भाई और भाभी का सम्मान करें 

लाल रंग का रुमाल उपयोग में लाएं लाल रंग के छोटे से रुमाल में सौंफ बांधकर शयनकक्ष में रख ले
कुंडली के सातवें खाने में सूर्य चंद्र गुरु बुध के साथ हो तो दूसरे के झगड़े में जाकर बर्बाद होता है मंगल के दाएं बाएं सूर्य एवं चंद्रमा हो तो मुफ्त का उपहार न ले ।
अगर मंगल अशुभ स्थिति में है तो जातक को क्रोध नहीं करना चाहिए।

अगर शुभ स्थिति में हो तो जातक शांत स्वभाव वाला साहसी धार्मिक उत्तम गुणों की क्षमता से युक्त होता है।
मंगल और मांगलिक योग उसकी कुंडली में उत्तम फल देते हैं मंगल दोष क्या है इसके विषय में अधिकतर लोग परिचित हैं 
जिस जातक के जन्म चक्र में मंगल ग्रह लग्न चतुर्थ सप्तम अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है उसे ज्योतिष शास्त्र में मंगल दोष युक्त माना जाता है ऐसे जातक को विवाह संबंधी बाधाएं दांपत्य सुख में न्यूनता आती है और अगर उसके भावी जीवनसाथी के जन्म चक्र में भी उसी के अनुरूप ग्रह नहीं हो तो उसके जीवन साथी के लिए यह अनुकूल नहीं है।
पर उसकी मृत्यु हो जाए यह कहना ठीक नहीं 
मंगल दोष के विषय में स्पष्ट लिखा गया है।

लग्ने व्यते च पाताले जामित्रे चाष्टमें कुंजे।
कन्या भर्तुविनाशाय भर्तु कन्या विनाशयेत।।

इसी प्रकार अगर इन भाव में पाप ग्रह जैसे शनि राहु केतु सूर्य आदि स्थित हों तो यह मंगल ग्रह के परिहार हैं 

लग्नादि धोवा यदि जन्म काले
महिसुतो वांशति राहु केतव:।।
व्यथाष्टतुये प्रथमे कलत्रे कन्या वर।
हन्ति           वरश्च          कन्याम।।

मंगल ग्रह की शांति के लिए सबसे उत्तम विषय यह है कि आप किसी सर्वोत्तम जानकार विद्वान आचार्य से वैदिक तथा तंत्रोक्त दोनों ही प्रकार से अनुष्ठान कराएं तथा भूमि, भवन, वाहन, के शुभ फलों को प्राप्त करे।
अगर आप किसी कारण से जप पूजन करने में असमर्थ है तो निम्न उपाय करें।
 निम्न वस्तुओं का दान करते रहना चाहिए लाल मूंगा, तांबा, मसूर की दाल,गुड, शुद्ध घी, लाल चंदन लाल कनेर के फूल, लाल केसर, लाल वस्त्र, गेहूं,
 
  तथा मूंगा रत्न धारण करें मंगलवार के दिन आप 10000 बार यह मंत्र पाठ करें~
  मंगल ग्रह का तांत्रिक मंत्र-
ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:।।

मूंगा 7 रत्ती का हो और उसे तांबे की अंगूठी में जड़वा कर मंगलवार के दिन धारण करें जब मंगल की महादशा में मंगल का अंतर हो तो इष्टदेव का स्मरण करें रामायण के सुंदरकांड का पाठ करें राम चरित्र मानस का पाठ भी मंगल दोष का समन कराता है लाल रंग को अधिकतर देखें और  क्रोध कम करें 
अधिक कामवासना से अलग रहे मंगलवार को एक समय मीठा भोजन करें हनुमान चालीसा का पाठ करें क्रोध आलस्य का त्याग करें पेट से संबंधित रोग आपको रह सकते हैं इसलिए गंगा जल का सेवन और  रुद्राक्ष को धारण  करे रुद्राक्ष रोगों का शमन कर सकता है

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अन्नप्राशन संस्कार- शिशु को पहली बार अन्न कब और कैसे ग्रहण कराए ?Annaprasan Sanskar Sanatan Dharma Culture

नामकरण संस्कार, क्यों है जरूरी क्या है महत्व

पूजन कार्य आरम्भ करने से पहले आचमन करना क्यों है जरूरी, ?