क्यो किया जाता है 108 बार जप,मंत्र जप विधि,तथा माला का प्रयोग,
क्यों किया जाता है किसी मंत्र का 108 बार जाप
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 भागों के नाम राशियों से है,मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। अतः ग्रहों की संख्या 9 का गुणा 12 राशियों से किया जाए तो 108 प्राप्त होता है।
तथा 27 नक्षत्रों को उनके चार चरणो से गुणा करे तो 108 हो होते हैं। माला का एक-एक दाना नक्षत्र के एक-एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है। इन्हीं कारणों से माला में 108 मोती होते हैं।इसी कारण हम सभी 108 बार जप करते हैं।
सर्वप्रथम जप माला प्रयोग के नियम
माला हमेशा व्यक्तिगत होनी चाहिए,
दूसरे की माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए,
जप करने की माला को हमेशा गुप्त रखना चाहिए,
मंत्र को भी गुप्त रखना चाहिए किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए, एकाग्र चित् एकाग्र ध्यान होना चाहिए,
मंत्र जाप करते समय जिव्हा को नहीं हिलाना चाहिए मुंह को भी नहीं खोलना चाहिए,
मुंह से बाहर मंत्र नहीं आना चाहिए,मंत्र मन और मस्तिष्क में ही मंत्र रहना चाहिए,
माला के हर मनके के बाद एक गाँठ जरूर लगी होनी चाहिए,मंत्र जाप करने के पूर्व हाथ में माला लेकर प्रार्थना करनी चाहिए कि माला से किया गया मंत्र जाप सफल हो
मंत्र जाप करने के पूर्व हाथ में माला लेकर प्रार्थना करनी चाहिए कि माला से किया गया मंत्र जाप सफल हो.
मंत्र जप के समय तर्जनी अंगुली से माला का स्पर्श नहीं होना चाहिए साथ ही सुमेरु का उल्लंघन भी नहीं होना चाहिए
मंत्र जप के समय माला किसी वस्त्र से ढंकी होनी होनी चाहिए या गोमुखी में होनी चाहिए यह याद रखना चाहिए जिस माला से मंत्र जाप करते हैं, उसे धारण नहीं करें
ॐ माँ माले महामाये सर्वशक्तिस्वरूपिणी।
चतुर्वर्गस्त्वय न्यास्तस्मान्मे सिद्धिदा भव।।
ॐ अवघ्नं कुरु माले त्वं गृणामि दक्षिणे करे ।
जपकाले च सिध्दर्थ प्रसीद मम सिद्धये ।।
ॐ अक्षमालाधिपतये सुसिद्धिं देहि देहि सर्वमन्त्रार्थसाधिनि साधाय साधाय सर्व सिद्धिं परिकल्पपय मे स्वाहा।
माला रुद्राक्ष,तुलसी, चन्दन,वैजयंती, रुद्राक्ष, कमल गट्टे, स्फटिक, पुत्रजीवा, अकीक, मोती,पन्ना,मूंगा,रत्नादि किसी की भी हो सकती है। अलग-अलग कार्य सिद्धियों के अनुसार ही इन मालाओं का चयन होता है।
माला के 108 मनके हमारे हृदय में स्थित 108 नाड़ियों के स्वरूप हैं। माला का 109वां मनका सुमेरु कहलाता है। जप करने वाले व्यक्ति को एक बार में 108 जाप पूरे करने चाहिए। इसके बाद सुमेरु से माला पलटकर पुनः जाप आरंभ करना चाहिए।
किसी भी स्थिति में माला का सुमेरु लांघना नहीं चाहिए। माला को अंगूठे और अनामिका से दबाकर रखना चाहिए और मध्यमा उंगली से एक मंत्र जपकर एक दाना हथेली के अंदर खींच लेना चाहिए। तर्जनी उंगली से माला का छूना वर्जित माना गया है। मानसिक रूप से पवित्र होने के बाद किसी भी सरल मुद्रा में बैठें जिससे कि वक्ष, गर्दन और सिर एक सीधी रेखा में रहे। मंत्र जप पूरे करने के बाद अंत में माला का सुमेरु माथे से छुआकर माला को किसी पवित्र स्थान में रख देना चाहिए। मंत्र जप में कर-माला का प्रयोग भी किया जाता है।
जप समापन करने पर बोले जाने वाला मंत्र
गुह्रातिगुह्रागोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम ।
सिद्धिभर्वतु मे देवि त्वत्प्रसादान्महेश्वरी ।।
हे परम कल्याणी भगवती मुझे मेरे द्वारा किए गए जप से सिद्धि की प्राप्ति हो।
जिनके पास कोई माला नहीं है वह कर-माला से विधि पूर्वक जप करें। कर-माला से मंत्र जप करने से भी माला के बराबर जप का फल मिलता है।
सनातन धर्म परंपरा के अनुसार अलग-अलग जप करने से अलग-अलग फल की प्राप्ति होती है अलग-अलग मंत्रों से अलग-अलग सिद्धियां प्राप्ति होती है।
हर मंत्र के लिए अलग विधि और विधान होता है
माला का प्रयोग क्यों किया जाता है ?
माला का प्रयोग इसलिए किया जाता है कि मंत्र जप की संख्या में कोई गलती न हो जाए माला के दानों को मनका कहा जाता है लगभग सभी मालाओ में 108 मनके होते हैं हालांकि इसमें 27 अथवा 54 मनके भी होते हैं
27 मनके से कम की माला नहीं होनी चाहिए वह सर्वथा वर्जित है
अलग-अलग मंत्र के जाप के लिए माला भी अलग-अलग प्रयोग की जाती है
रुद्राक्ष की माला अधिकांश मंत्रों का जाप रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं. महामृत्युंजय और लघुमृत्युंजय मन्त्र केवल रुद्राक्ष पर ही जप सकते हैं
स्फटिक की माला मां सरस्वती और मां लक्ष्मी के मन्त्र इस माला से जपना उत्तम होता है
हल्दी की माला बृहस्पति देव और मां बगलामुखी के मन्त्रों के लिए हल्दी की माला का प्रयोग होता है. ज्ञान और संतान प्राप्ति के मन्त्रों का जाप भी कर सकते हैं
चन्दन की माला दो तरह की चंदन की माला का प्रयोग किया जाता है. लाल चन्दन और श्वेत चन्दन. देवी के मन्त्रों का जाप लाल चन्दन की माला से किया जाता है. भगवान् कृष्ण के मन्त्रों के लिए सफ़ेद चन्दन की माला का प्रयोग किया जाता है
तुलसी की माला भगवान् विष्णु और उनके अवतारों के मन्त्रों का जाप तुलसी की माला से किया जाता है. मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माला तुलसी की मानी जाती है।
यह माला धारण करने पर वैष्णव परंपरा का पालन करना चाहिए, तुलसी की माला पर कभी भी देवी और शिव जी के मन्त्रों का जप नहीं करना चाहिए
सत्य सनातन धर्म की जय हो
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