2023 में होलिका दहन कब ? #होलिका #Happy_holi

फाल्गुन मास की पूर्णमासी तिथि पर होली का निर्णय फाल्गुन मास के पूर्णमासी को होली कहते
 हैं 
सायाव्यापनी ग्रहण करें शाम के समय में होलिका करें और प्रातः काल होली क्रीडा करें यह वचन निर्णयामृत में कहा है 
श्लोक 
प्रदोष व्यापिनी ग्राह्या पौर्णिमा फाल्गुनी सदा।
तस्यां भद्रामुखं त्यक्त्वा पूज्या होला निशामुख:।।

फाल्गुन मास की पूर्णिमा को प्रदोष व्यापिनी ग्रहण करें उसमें भद्रा के मुख्य को त्याग कर निशा मुख्य में होलिका पूजन करें 

नारद के वचन से प्रदोष व्यापिनी ग्रहण करें यह कहा है 
आचार्य आनन्द प्रकाश नौटियाल कमलेश्वर श्रीनगर गढ़वाल 

भद्रा निर्णय श्लोक 
भद्रायां दीपिताहोली राष्ट्रभंगं करोति वै।
नगरस्य च नैवेष्टा तस्मात्तां परिवर्जयेत्।।

जो भद्रा में होलिका दहन करता है तो ऐसी होली राष्ट्रभंग करती है राष्ट्र में कष्ट व्याप्त करती है इसलिए भद्रा से युक्त पूर्णिमा में होलिका दहन ना करें ।
श्लोक 
भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।
श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी।।

भद्रा में दो कार्य नहीं करने चाहिए श्रावण मास की भद्रा में रक्षाबंधन पर्व को त्यागना चाहिए तथा फाल्गुन मास की भद्रा में होलिका दहन को त्यागना चाहिए श्रावण मास की भद्रा राजा को नाश पहुंचाती है और फाल्गुन मास की भद्रा गांव को जलाती है 
भद्रा का स्वरूप पीयूष धारा टीका में देखें वहां पर आपको। विवरण मिल जाएगा
तथा भद्रा भी दो प्रकार की होती है सर्पणी भद्रा शुक्ल पक्ष की भद्रा तथा वृश्चिकी कृष्ण पक्ष की होती है 
सर्पनी भद्रा के मुख को सदैव त्याग करना चाहिए और वृश्चिकी का पुछ सदैव त्याज्य है 
इसलिए इस भद्रा को पूर्ण रूप से त्यागना चाहिए
बहुत से लोग कहते हैं कि भद्रा मृत्युलोक की खराब होती है स्वर्ग और पाताल की शुभ मानी जाती है लेकिन जिस लोक में भद्रा होती है उस लोग के लिए वह है कष्टकारी होती है जैसे कि इस बार मृत्युलोक की भद्रा है तो मृत्युलोक की भद्रा यह पृथ्वीलोक के लिए कष्टकारी है इसलिए भद्रा को त्याग कर ही होलिका दहन किया जाना चाहिए तथा कुंभ मीन तथा कर्क और सिंह के चंद्रमा में ही भद्रा का दोष मानना 
चाहिए अन्य राशियों के चंद्रमा में भद्रा को दोष नहीं माना जाता है

श्लोक 
दिनार्धात्परतोsपि स्यात फाल्गुनी पूर्णिमा यदि।
रात्रो भद्रावसाने तु होलिका दीप्यते तदा।।

और दिन के आधे भाग बाद भी यदि फाल्गुन मास की पूर्णिमा हो तो रात में भद्रा की समाप्ति पर होलिका को जलाना चाहिए 
श्लोक

यदा पूर्व देने चतुर्दशी प्रदोष व्यापिनी परदिने च क्षयवशात सायाहत प्रागेव पूर्णिमा स्मापयते तदा पूर्व दिने सम्पूर्ण रात्राे भद्रासत्वात तत्र च तन्नी शेधात परेsहनि प्रतिपधेव कुर्यात सार्धयामत्रय वा स्याद द्वितीय दिवसे यदा प्रतिपद्धर्धमाना तु तदा सा होलिका स्मृता 
 
यदि पहले दिन चतुर्दशी भद्रा रहित काल के अलाव में प्रदोष व्यापिनी हो तो दूसरे दिन छयवस से साय काल के पूर्व ही पूर्णिमा समाप्त होती हो तो पहले दिन संपूर्ण रात्रि में भद्रा होने से और उसमें उसका निषेध होने से दूसरे दिन प्रतिपदा तिथि में ही होलिका को जलाना चाहिए
यदि बहिर्गत प्रतिपदा दूसरे दिन साढ़े तीन याम से अधिक हो तो तब उसे होलिका कहते हैं यह भविष्य पुराण के वचन को निर्णयामृत कार ने कहा है और मदनरत्न ने भी यही कहा है
इस बार पूर्णिमा तिथि 6 मार्च 2023 को प्रदोष व्यापिनी है अगले दिन 7 मार्च को पूर्णिमा प्रदोष काल को इस वर्ष भी नहीं कर रही है पूर्व दिन प्रदोष काल में भद्रा व्याप्त है भद्रा 4:19 से आरंभ होकर अगले दिन प्रातः 5:17 तक है इस स्थिति में शास्त्र कारों ने निर्देश किया है यदि प्रतिपदा वृद्ध गामिनी हो तो दूसरे दिन प्रदोष काल की प्रतिपदा में होलिका का दहन किया जाता है 
प्रदोष काल कितने समय का होता है 

त्रिमुहूर्तं प्रदोष: स्याद्-भानौ- अस्तंगते सति।

सूर्यास्त के बाद तीन मुहूर्त का प्रदोष काल होता है । एक मुहूर्त दो घड़ी यानी 48 मिनट का होता है सूर्यास्त के बाद 6 घड़ी तक(दो घंटा चौबीस मिनट) प्रदोष काल माना जाता है। वत्स ऋषि और गौडाचार्य ने कहा है कि सूर्यास्त के बाद दो घड़ी का प्रदोष काल होता है।

इसलिए इस वर्ष होलिका दहन 7 मार्च को शाम 6 बजकर 15 मिनट से लेकर 8 बजकर 36 मिनट तक किया जाएगा तथा 8 मार्च को पूर्ण रूप से होली छारोली कार्यक्रम किया जाएगा आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं 

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